देश की सत्ता पर छह दशक तक शासन करने वाली कांग्रेस की ओर से प्रतीक्षारत प्रधानमंत्री जी पूछ रहे हैं कि लद्दाख सीमा पर भारतीय सैनिकों को निःशस्त्र किसने और क्यों भेजा? इस सवाल का जवाब माननीय प्रतीक्षारत प्रधानमंत्री जी आपको अपने पूर्वज द्वारा किये गये कार्यों के अवलोकन से मिल जाएगा, थोड़ा श्रम तो करें. जिस चीन की सीमा भारत के किसी भू-भाग से नहीं मिलती थी, अब उसके साथ सीमा विवाद हो रहा है तो इस सीमा को किसने अस्तित्व में लाया था, यह सवाल भी माननीय प्रतीक्षारत प्रधानमंत्री जी को पूछना चाहिए. हमारी सीमा चीन के बजाय तिब्बत से मिलती थी, जिसे माननीय प्रतीक्षारत प्रधानमंत्री जी के परनाना तथा देश के प्रथम प्रधानमंत्री श्री पंडित जवाहरलाल नेहरू जी ने माओ ज़ेडोंग को थाली में रख कर परोसा था. अक्साई चिन तो बंजर पथरीला जमीन का टुकड़ा था ना? जिसे चीन ने कब्जा लिया तो उससे लेने के बजाय यहीं कहा था न पंडित नेहरू जी ने?
2004 से 2014 तक आपकी ही सरकार सत्ता में थी, तब क्या आपने अक्साई चिन को लेकर कभी कोई बात की. नहीं ना? हां, 2008 में आपने चीन की कम्युनिस्ट पार्टी के साथ जरूर एक करार किया, जिससे आप और वो दोनों अपने वैचारिकी का आदान-प्रदान कर सके. इसी वैचारिकी आदान-प्रदान की प्रतिबद्धता के कारण आप 2017 में दिल्ली-स्थित चीनी दूतावास में चाउमीन और मोमो का आनंद ले रहे थे, उस समय शी जिनपिंग डोकलाम को दखलिया रहे थे. मानसरोवर के रिक्त होने व सांप-बिच्छु तक खा जाने वाले चीनियों द्वारा राजहंसों को पका कर खाने पर आपके हृदय में कभी कोई दर्द नहीं हुआ. मैं मानता हूं कि चीनियों का यह कृत आपको हृदयविदारक नहीं लगेगा. क्योंकि आप सिर्फ चुनाव जीतने के लिए ही जनेव धारण करते हैं, जनेव धारण करने के पूर्व जो उपनयन संस्कार होते हैं उससे आप संस्कारित नहीं है. यह उस संस्कार विहिनता का द्योतक है कि राजहंसों के गर्दन मरोड़े जाने पर आपको दर्द नहीं हुआ.
माननीय प्रतीक्षारत प्रधानमंत्री जी अब आपके चीर साथी की भी बात की जाए. 19 जून, 2020 को भारत के लद्दाख सीमा पर हुए विभत्स हिंसक संघर्ष के बाद उपजी परिस्थितियों पर प्रधानमंत्री द्वारा आहुत सर्वदलीय बैठक में आपकी माता श्री के साथ ही आपके साथी भारतीय कम्युनिस्ट पार्टी के डी राजा भी मौजूद थे. इस बैठक में उनका सारा ध्यान इसी ओर था कि भारत अपना सामरिक सहयोग अमेरिका के साथ क्यों कर रहा है, लेकिन डी राजा ने एक शब्द भी चीन के संबंध में नहीं कहा. इसी तरह भारत में मार्क्सवादी कम्युनिस्ट पार्टी के संस्थापक नंबूदरीपाद महोदय जी ने 1962 में चीन द्वारा असम पर किये गये हमले के समय कहा था – ‘भारत का कहना है चीन ने हमला किया. चीन बोलता है भारतीय सैनिकों ने घुसपैठ की. हमारी पार्टी जांच करेगी, फिर बताएगी कि आक्रमण किसने किया था.’ मार्क्सवादी कम्युनिस्ट पार्टी ने जांच की या नहीं की, अब तक उस जांच की रिपोर्ट भारतीय जनमानस के सामने नहीं आई. लेकिन नंबूदरीपाद जी के उतराधिकारी आज भी उसी मनोस्थिति में है.
माननीय प्रतीक्षारत प्रधानमंत्री जी अब भी समय है. कृपया राजनीति के सिद्धांत और मर्यादाओं के निर्वहन तथा राष्ट्रहित के कुछ पंक्तियों का अध्ययन कर उसे अपने आचार-विचार में शामिल करें अन्यथा आप सदैव ही माननीय प्रतीक्षारत प्रधानमंत्री ही रहेंगे.

चीन को पड़ोसी किसने बनाया ?देश की सत्ता पर छह दशक तक शासन करने वाली कांग्रेस की ओर से प्रतीक्षारत प्रधानमंत्री जी पूछ…

Posted by Manoj K Jain on Sunday, June 21, 2020

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